Friday, December 28, 2018

15 मजदूरों को बचाने का अभियान तेज, वायुसेना का हर्कुलस भी एक्टिव

मेघालय की एक खदान में पिछले करीब 15 दिनों से फंसे 15 मजदूर अभी तक निकल नहीं पाए हैं. सरकार, एनजीएओ, प्राइवेट कंपनी सभी मिलकर इन्हें बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं. आज एयरफोर्स भी इन सभी की मदद करने के लिए मेघालय पहुंच रहे हैं, जिसके बाद अधिक बचावकर्मी मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे. बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी इस मसले पर बात की.

वायुसेना 21 सदस्यों की टीम और 10 बड़े पंपों को लेकर भुवनेश्वर से गुवाहाटी के लिए रवाना हो गई है. वायुसेना का C-130J Super Hercules इस टीम को ले जा रहा है.

निजी कंपनी भी पहुंची मदद करने

मेघालय की पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले की कोयले की खदान से पानी भरने से उसमें पिछले एक पखवाड़े से फंसे 15 लोगों को निकालने में मदद करने के लिए निजी पंप निर्माता कंपनी मौके पर पहुंच गए हैं. यह कंपनी खदान से पानी निकालने में स्वेच्छा से उपकरण मुहैया करा रही है.

गौरतलब है कि मजदूर यहां करीब 370 फुट अवैध खदान में फंसे हुए हैं. इनके अलावा कोल इंडिया की तरफ से भी मदद का प्रस्ताव दिया गया है. दरअसल, खदान में पानी अधिक मात्रा में भर जाने के कारण काफी दिक्कतें आ रही हैं. यहां जिन पंपों के जरिए पानी को निकाला जा रहा था उनकी हॉर्स पावर कम थी, जिसके कारण बाहर से मदद पहुंचाई जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था.

बता दें कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इसके लिए गहरी सुरंगों के लोकेशन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार 2014 से प्रतिबंधित इन कोयला खदानों को कानूनी वैधता और नियमित किए जाने के समर्थन में है.

बीते 13 दिसंबर की सुबह पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के अवैध कोयला खदान में अचानक पानी भर जाने से कारण 15 मजदूर अंदर फंस गए थे. जल भराव के कारण संकरी सुरंगों के जरिए खदान के अंदर घुसे मजदूरों तक बचाव दल पहुंच नहीं पा रहा है. वहीं पानी निकालने का प्रयास लगातार जारी है.

उत्तर प्रदेश में कौन होगा सहयोगी?

उत्तर प्रदेश में अभी तक तय ही नहीं है कि कांग्रेस किसके साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी. जबकि सपा-बसपा बिना कांग्रेस को साथ लिए चुनाव गठबंधन करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में होता है तो फिर कांग्रेस के पास अकेले या छोटे दलों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने का विकल्प बचता है. ऐसे में कांग्रेस के विपक्षी एकता को बड़ा झटका लग सकता है.

पश्चिम बंगाल में दो राहे पर कांग्रेस

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस वामपंथी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी या फिर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के साथ गठबंधन करेगी? इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है. हालांकि, कांग्रेस दोनों पार्टियों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चल रही है, लेकिन यह भी सच है कि मौजूदा समय में बंगाल की राजनीति में वामपंथी दलों से ज्यादा टीएमसी मजबूत है.

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